किताबों से दूर होती नई पीढ़ी, खाली पड़े पुस्तकालयों पर सीएम योगी की चिंता
डिजिटल दौर में नई पीढ़ी की किताबों और पुस्तकालयों से घटती दूरी चिंता का विषय है। यूपी में पठन अभिरुचि बढ़ाने और पुस्तकालयों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
पुस्तकालयों की बदहाली पर सीएम योगी की चिंता, बोले- पठन-पाठन का माहौल होता जा रहा
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था में पढ़ने की आदत, पुस्तकालयों की भूमिका और शिक्षक-विद्यार्थियों के बीच संवाद की परंपरा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज पठन-पाठन का माहौल धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है और पुस्तकालय, जो कभी ज्ञान के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, अब वीरान नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की किताबों के अलावा संदर्भ और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित ज्ञान देने के बजाय विषय की गहराई और प्रमाणिक जानकारी से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि पढ़ने की संस्कृति को दोबारा मजबूत किया जाए और पुस्तकालयों को फिर से सक्रिय ज्ञान केंद्र बनाया जाए।
पहली कक्षा से बने पढ़ने का माहौल
सीएम योगी ने शिक्षा की शुरुआत को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पहली कक्षा बच्चे के शैक्षिक जीवन की नींव होती है। इसे केवल औपचारिक शुरुआत न मानकर ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिससे बच्चों के मन में सीखने, पढ़ने और सवाल पूछने की जिज्ञासा पैदा हो।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रहें। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच निरंतर संवाद होना चाहिए। ज्ञान केवल किताबों से नहीं, बल्कि अनुभव, बातचीत और समाज को समझने से भी मिलता है।
पुस्तकालयों में फिर लौटे पाठक
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले पुस्तकालयों में शिक्षक और विद्यार्थी नियमित रूप से जाते थे। पाठ्यक्रम के अतिरिक्त संदर्भ पुस्तकें पढ़ने से विद्यार्थियों को व्यापक और प्रामाणिक ज्ञान प्राप्त होता था। लेकिन आज कई स्थानों पर पुस्तकालयों में पाठकों की कमी चिंता का विषय है।
उन्होंने इस स्थिति को बदलने की जरूरत बताते हुए पढ़ने की आदत को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया। पुस्तकालयों में विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार नई किताबें, शोध सामग्री और ज्ञानवर्धक साहित्य उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए।
शिक्षकों का समाज से जुड़ाव भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के सामाजिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले शिक्षक गांव-गांव जाकर जनगणना जैसे कार्यों में हिस्सा लेते थे। इससे उन्हें समाज की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिलता था। उनके अनुसार, ऐसे अनुभव शिक्षकों के ज्ञान को किताबों से बाहर वास्तविक जीवन से जोड़ते थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को अपने समाज, इतिहास और आसपास की परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
विश्वविद्यालय की विरासत जानना भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संदर्भ में कहा कि यहां अध्ययन या अध्यापन करने वाले लोगों को विश्वविद्यालय के संस्थापकों, पूर्व कुलपतियों और विशिष्ट पूर्व छात्रों के इतिहास की जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी या शिक्षक को अपने विश्वविद्यालय की स्थापना, उसकी उपलब्धियों और समृद्ध परंपरा के बारे में जानकारी नहीं है, तो यह उस संस्थान और स्वयं उसके प्रति अन्याय है।
सीएम योगी ने कहा कि अपनी शैक्षिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की प्रमाणिक जानकारी होना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों में अपने संस्थान के प्रति गौरव की भावना पैदा होगी और वे उसकी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे।